Anupam S. "Shlok"

पथरीली राहों से अनुपम नहीं डरा करते
जीवन की समाप्ति पर अनुपम नहीं मरा करते
लोगों के पद डगमग करते अनुपम सीधे चलते जाते
लोग चिदायें लाख मगर अनुपम नहीं चिड़ा करते

अनुपम सीधे चलते जाते, पाने को उनका लक्ष्य कठिन
अनुपम प्रकाश के मूल वर्ण . चाहे हो जितना अंध सघन
दीप दीप से दीप जलाकर ,अनुपम दीपक बनते हैं
अनुपम क्या पावें पावक को जो पाएंगे ईश अगन.
जो परखे एकशः वो मानव ,जो बार बार वो है अनुपम.
जो माफ़ करे वो है मानव,जो प्रेम करे वो है अनुपम.
गंगा तो है नमन योग्य ,अनुपम पावन से भी पावन.
हर काल समय में प्रकट हुए , मानव के हैं श्रृंगार अनुपम,

Anupam S "Shlok"
+91 8447757188
Actor, Writer, Director, Philosopher, HR
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Location - Delhi, India