Sanjay Sharma
Sanjay Sharma
दिल का दर्द जुबां पर लाने को जी चाहता है।
तेरे प्यार के समुन्दर में डूब जाने को जी चाहता है।।
वो तो ये दुनिया ही जालीम है वरना।
जिन्दगी भर तुम्हारा साथ निभाने को जी चाहता है।।
जब भी हम खिलते हुए चांद को देखते हैं।
तो ना जाने क्यों आपके प्यार को आजमाने को जी चाहता है।।
तुम से दूर हूं तो क्या गम है।
तुम से दूर रहकर तुम्हें तड़पाने को जी चाहता है।।
दिल की बात को किस तरह से कह गया हूँ मैं।
बस तुम्हें इसी तरह से गजल सुनाने को जी चाहता है।।
----संजय -