Ashish Srivastava

I am a software from New Delhi, India. I am currently a Project Lead at Sagoon Inc. I have a strong passion for web development, mobile development and open source technologies. I have been pursuing my passion for more than 5 years now and have gained expertise in PHP, MySQL, Javascript, Jquery, Ajax, Objective C and many other open source technoloies. I have successfully led multiple projects of varied complexity for clients based out of South East Asia, Europe and US.

Outside of work, I enjoy travelling and learning new culture. I have been afforded the opportunity to do quite a bit of traveling for both work and personal reasons. This has enabled me to learn so much about the world. I appreciate people along with their various cultures, languages, similarities and differences.

गुजरते लम्हों मैं सदिया तलाश करता हु
ये मेरी प्यास है नदिया तलाश करता हु
यहाँ तो लोग गिनते है खुबिया अपनी
मैं अपने आप में कमिया तलाश करता हु

मत अब सोचो की क्या खता किस्से हुई ठोकरों से ही होंगे जिंदगी मैं तजुर्बे कई.

कुछ पल साथ निभालो , जो वक्त मिले तो
ये साथ किसी की हिम्मत बन जाएगा .....

कुछ पल दर्द बाँटलो , जो वक्त मिले तो
ये सहारा किसी की उम्मीद बन जाएगा ....

कुछ पल खुशी मनालो , जो वक्त मिले तो
ये खुशी किसी की मुस्कान बन जाएगा ....

कुछ पल प्यार करलो , जो वक्त मिले तो
ये प्यार किसी की ज़िंदगी बन जाएगा .....

कुछ पल ज़िंदगी जीलो , जो वक्त मिले तो
ये ज़िंदगी किसी के लिए मिसाल बन जाएगा

खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाहता हूं, मैं..
दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है.. दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..
जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया.. साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाहता हूं, मैं..
वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उनके बिना.. तन्हाई साथ है मेरे, इतना बताना चाहता हूं..
ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना.. मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाहता हूं, मैं..
बस खुशी हो हर पल, और महकें ये गुलशन सारा .. हर किसी के गम को, अपना बनाना
चाहता हूं, मैं.. एक ऐसा गीत गाना चाहता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाहता हूं,मै इस छोटी सी जिन्दगी के, गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,मै
सब को अपना कह सकूँ, ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,मै
टूटे तारों को जोड़ कर, फिर आजमाना चाहता हूँ,मै
बिछुड़े जनों से स्नेह का, मंदिर बनाना चाहता हूँ.मै
हर अन्धेरे घर मे फिर, दीपक जलाना चाहता हूँ,मै
खुला आकाश मे हो घर मेरा, नही आशियाना चाहता हूँ,मै
जो कुछ दिया खुदा ने, दुगना लौटाना चाहता हूँ,मै
जब तक रहे ये जिन्दगी, खु���ियाँ लुटाना चाहता हूँ मै