Gagandeep Makhija
New Delhi, India
तुम लोगो की इस दुनिया में हर इंसान गलत... मैं सही समझ के जो भी कहूँ... तुम कहते हो गलत... मैं गलत हूँ.. तो फिर कौन सही... मर्ज़ी से भी जीने की भी मैं... क्या तुम सबको अर्जी दूं... मतलब की तुम सबका मुझपे... मुझसे भी ज्यादा हक है...