हरजी चौधरी अरटी

Small Business Owner in छात्रसंघ अध्यक्ष राजकीय महाविद्यालय सेड़वा

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हरजी चौधरी अरटी: गांव से उठी आवाज जो बन गई छात्र राजनीति की मिसाल

राजस्थान के सीमांत जिले बाड़मेर के फागलिया ब्लॉक में बसा एक छोटा सा गांव अरटी — जहां आज भी मिट्टी की सोंधी महक, खेतों की हरियाली और गांव की सादगी हर दिल को छू लेती है। इसी गांव में जन्मा एक बालक, जिसने अपने जज़्बे, संघर्ष और नेतृत्व क्षमता से पूरे कॉलेज को नहीं, बल्कि छात्र राजनीति के मानचित्र को हिला दिया — हरजी चौधरी अरटी।

जड़ें जहां से शुरू हुईं हरजी का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। उनके पिता मेशाराम चौधरी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और माता जेती देवी एक सच्ची गृहिणी हैं, जिनके संस्कारों ने हरजी के भीतर जमीन से जुड़ाव और सेवा भावना का बीज डाला। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का वातावरण था, लेकिन संसाधन सीमित थे। परंतु यह सीमितता कभी भी हरजी के आत्मविश्वास को सीमित नहीं कर पाई।

शुरुआती शिक्षा गांव के ही स्कूल में पांचवीं कक्षा तक हुई। इसके बाद बेहतर शिक्षा की तलाश में एक निजी विद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन वहां का माहौल उन्हें अपनी मिट्टी से दूर सा लगा। इसलिए उन्होंने पास के गांव अरटा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में दाखिला लिया। यहां उन्होंने 9वीं तक पढ़ाई की, लेकिन फिर से उनका मन अपने ही गांव की ओर खिंचने लगा। वे लौटे — अपने गांव, अपने लोगों और अपने सपनों के बीच। यहीं, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अरटी से उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा पूरी की।

छात्र राजनीति की ओर पहला कदम हरजी में बचपन से ही नेतृत्व की भावना स्पष्ट दिखती थी। गांव के आयोजन हों या विद्यालय के कार्यक्रम — हरजी का नाम सबसे आगे होता। उनकी आवाज में दम था, सोच में साफगोई और व्यवहार में अपनापन। यही बातें उन्हें दूसरों से अलग करती थीं।

12वीं के बाद उन्होंने राजकीय महाविद्यालय सेड़वा में प्रवेश लिया, जहां से उनका असली राजनीतिक सफर शुरू हुआ। कॉलेज के पहले ही दिन से ही उन्होंने कैंपस में छात्र हितों के मुद्दे उठाने शुरू कर दिए — लाइब्रेरी की बदहाली, छात्रवृत्ति की अनियमितता, मूलभूत सुविधाओं की कमी — हर मुद्दे को आवाज दी।

संघर्ष की परीक्षा और नेतृत्व का उदय कॉलेज में तीन साल तक हरजी ने अनगिनत संघर्ष किए। कई बार कॉलेज प्रशासन से टकराव हुआ, कई बार धमकियां मिलीं, लेकिन हरजी पीछे नहीं हटे। उनके लिए छात्र पहले थे, पद बाद में। उनका नारा था — "छात्रों का हक मिलेगा, चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े।"

उनकी लोकप्रियता इस कदर बढ़ी कि कॉलेज परिसर में उनका विरोध करना ही किसी संगठन के लिए भारी पड़ने लगा। इसी दौरान छात्र राजनीति की सबसे बड़ी परीक्षा आई — छात्रसंघ चुनाव।

ऐतिहासिक चुनाव — जब ABVP मैदान से भाग खड़ी हुई 2022 में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा हुई। हरजी के नाम की चर्चा पहले ही पूरे कॉलेज में थी। उनकी सादगी, स्पष्ट दृष्टिकोण और दमदार टीम ने छात्रों का दिल जीत लिया था। NSUI ने उन्हें अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया।

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