Ajay Kumar
Jairampur Murliganj
नई चुनौतियों के लिए हो जाएं तैयार
हर नया दिन एक नई चुनौती के साथ शुरू होता है, हर नया समय नए संघर्ष का साक्षी होता है। नए वर्ष में बीती बातों को भुलाकर नए सपनों के साथ एक ताजा शुरुआत करें। बेफिक्र, बेखौफ और बेतकल्लुफ होकर नए वर्ष का आगाज करें।
कहते हैं आगाज अच्छा हो तो अंजाम भी बेहतर होता है। खुश रहें और दूसरों को भी खुशियां बांटें। किसी रोते हुए को हंसा दें,किसी नाउम्मीद के दिल में आशा की नन्ही सी किरण ढूंढें, किसी जरूरतमंद की थोडी सी मदद कर दें। यही तो जिंदगी है! आपका नया वर्ष मंगलमय हो!
चुनौतियों को स्वीकार करना ही सफलता की कुंजी है। जिस दिन व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा, वह मर जाएगा।
नई उमंगों, नई तरंगों, नए संकल्पों और नए ख्वाबों से लबरेज एक नई सुबह रात के अंधेरे को चीरकर हमारे आंगनों में उतरने लगी है। फिर दीवारों ने बदले हैं कैलेंडर, चिडियों के राग मधुर हो गए हैं। समूची कायनात नए अंदाज में नजर आ रही है। शोर-शराबे, धूम-धडाके और मौज-मस्ती के बीच नए साल का आगाज हो गया है। ऐसे में चुप क्यों रहें। क्यों न कोई नई धुन बनाएं और कुछ गुनगुनाएं। कोई नई राह ढूंढें और शब्दों को कोई नए अर्थ दें।
नई खुशियां हैं तो नई चिंताएं भी हैं, नई इच्छाएं हैं तो चुनौतियां भी। नई जंग के लिए कमर कसें और कुछ नए संकल्प लें।
कार्य का नया ढंग
निजी विकास के लिए जरूरी है कि जीवन में नई चुनौतियां लें। नए लोगों के साथ काम करें। भिन्न स्वभाव, दृष्टिकोण और अनुभव वाले लोगों के साथ काम करने से बडी चुनौती दूसरी नहीं है। सामाजिक भय से मुक्त होकर नए दृष्टिकोण के साथ खुद से बिलकुल भिन्न व्यक्तियों के साथ काम करके देखें। इस चुनौती को स्वीकारें, नए एहसास आगे बढने को प्रेरित करेंगे।
जिम्मेदारी और नेतृत्व
सफलता मेरी है तो विफलता के लिए भी मैं ही जिम्मेदार हूं। इस सच को स्वीकार करें। घर-बाहर की जिम्मेदारियों का निर्वाह टीम भावना से करना महत्वपूर्ण है। टीम का अर्थ यह है कि सबके विचार सुने जाएं और सर्वसम्मति से सही निर्णय तक पहुंचा जाए। कभी कूटनीति से तो कभी स्पष्टता से बात कहने का तरीका भी समूह में काम करने के दौरान ही आता है।
विविधता का आनंद
कहते हैं, विविधता जिंदगी को ज्यादा जीवंत बनाती है और एकरसता उसे उबाऊ बना देती है। सबका मकसद खुशी पाना है और खुशी काम से मिलती है। अलग-अलग तरह के काम करना, कठिन कार्यो को चुनौती की तरह स्वीकार करना और इन सबके बीच मनोरंजन के पलों का आनंद उठाना ही खुश रहने का मंत्र है।
सच को स्वीकारें
क्या हम अपनी योग्यता, क्षमता, सीमा और गुणों-अवगुणों को पहचानते हैं? खुद को हम वास्तविकता में जानते हैं या अपनी आदर्श छवि हमने मन में बना रखी है? बाइबिल में कहा गया है, सत्