सुहास पाटेकर

Nanded

'अहिंसा' जैसी कोई अवधारणा नहीँ होती। यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसके सहारे मानवता को बेवकूफ बनाया गया है ।

"अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च l"

अर्थात् यदि अहिंसा परम् धर्म है, तो धर्म के लिए

हिंसा भी परम् धर्म है । अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है, और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है ।

दुनिया का सबसे बड़ा धर्म हिंदू धर्म है और मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ जिसमे हिंदू धर्म निभाने कि क्षमता नहीं है वह विश्व धर्म नहीं निभा सकता पूरे मनोयोग से अतः समय कि मांग है कि हम अपने हिंदू कि संबर्धित और सम्पन्न बनाये जीवन के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए धर्म रक्षा करे

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