MadhuSudan Singh
New Delhi, India
"ख़मोशी बोल उठे, हर नज़र पैग़ाम हो जाये , ये सन्नाटा अगर हद से बढ़े, कोहराम हो जाये , शकेब अपने तआरुफ़ के लिए ये बात काफ़ी है , हम उस से बच के चलते हैं जो रस्ता आम हो जाये.....!
"ख़मोशी बोल उठे, हर नज़र पैग़ाम हो जाये , ये सन्नाटा अगर हद से बढ़े, कोहराम हो जाये , शकेब अपने तआरुफ़ के लिए ये बात काफ़ी है , हम उस से बच के चलते हैं जो रस्ता आम हो जाये.....!