Sachin Jain

Sachin Jain

Doing Service Industry Diploma from S.P. Jain Mumbai,

Working in the Higher Technical Education Domain,

Presently Living in Noida, hometown Bulandshahr...

Loves to write poetry, do creative things

स्वयं को शब्दो में मैं व्यक्त करना चाहता हूँ,

सिखाया दुनिया ने जो उद्धत करना चाहता हूँ,

कुछ सरल, कुछ सुमधुर है व्यवहार मेरा,

कुछ बड़ा , कुछ विचित्र है आकार मेरा,

गर्व खुद पर,आत्मविश्वाश भी अधिक है,

दुनिया से अलग हूँ ,अहसास भी तनिक है,

भीड़ है चारो तरफ़, ना लगता है कोई अपना,

इस स्वार्थी दुनिया से अलग,एक नई दुनिया बसाना चाहता हूँ,

स्वयं को शब्दो में मैं व्यक्त करना चाहता हूँ………………..

सोच ज्यादा ,समझ ज्यादा,कुछ नया करने का नशा,

काम ऎसे करता रहूँ,कोइ ना हो मुझसे खफ़ा,

भाषा मधुर,भावुक ह्र्दय, सब के मन को मैं भाऊँ,

जिद्दी बहुत,कुछ जटिल भी, पर बात सब की मान जाऊँ,

बांधकर मैं पैर अपने,कब से धरती पर खड़ा हूँ,

अब तो मैं बस एक ऊचीं उड़ान भरना चाहता हूँ,

स्वयं को शब्दो में मैं व्यक्त करना चाहता हूँ.........

विश्वाश उस पर,यकीं खुद पर कि कुछ गलत होगा नहीं

जोश इतना,जूनून इतना, असंभव कुछ भी नहीं,

ना पसंद मुझको, कि तारों की तरह मैं टिमटिमाऊँ,

कुछ ऎसा करूँ,कि सूरज कि तरह मैं जगमगाऊँ,

सपने बड़े,आशा अधिक, मन में उम्मीदों का तूफ़ां,

चाँद पर एक आशियाना मैं बनाना चाहता हूँ,

स्वयं को शब्दो में मैं व्यक्त करना चाहता हूँ.........

कुछ लोगो के दिल में है बहुत सम्मान मेरा,

कुछ को लगता है कि मुझमे है अभिमान भरा,

कुछ करें विरोध मेरा,मुसीबत कुछ मुझे बताएं,

सबकी बातें अनसुनी कर,मन की मैं करता हि जाऊँ,

दुनिया चाहे कितनी भी ठोकरे मुझको खिलाए,

जैसा हूँ मैं,वैसा ही बने रहना चाहता हूँ,

स्वयं को शब्दो में मैं व्यक्त करना चाहता हूँ.............

सपने हजार, बातें हजार,उम्मीदे तो पचासं हजार,

डरना नहीं, झुकना नहीं, बीच में रुकना नहीं,

पहुचंना है बुलन्दि���ों पर, इतना तो विश्वास है,

बुलन्दियों को बुलन्द करना आरजू है मेरी,

ख्वाब अक्सर टूटते हैं जिन्दगी की जद्दोजहद में,

हर टूटते ख्वाब के बाद एक नया ख्वाब बनाना चाहता हूँ,

स्वयं को शब्दो में मैं व्यक्त करना चाहता हूँ…………………..