vikas shukla

"गर्मियेँ हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैँ, हम चिरागोँ की तरह शम्मा से जल जाते हैँ, शम्मा जलती है जिस आग मे नुमाइश के लिये, हम उसी आग मे गुमनाम से जल जाते हैँ। जब भी आता है तेरा नाम मेरे नाम के साथ, न जाने क्योँ लोग मेरे नाम से जल जाते हैँ" . . "सिर्फ हँगामा खङा करना मेरा मकशद नही, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिये। मेरे सीने मे नही तो तेरे सीने मे सही, हो कही भी आग। लेकिन आग जलनी चाहियेँ" . . "मै एक आइना हूँ, अगर तुम मुझे देखके हँसोगे, तो मै हँसुगा। अगर तुम रोओगे, तो मै भी रोने लगुगा। लेकिन अगर तुम मुझे मारोगे, तो मै तुम्हेँ मारुँगा नही, टूट जाउगा" . . . "व्यक्ति को हमेशा अपने कर्म व मेहनत पर विश्वास करना चाहिये, न कि किसी दूसरे की मेहनत पर" . . . "हमे कभी क्रोध नही करना चाहिये। क्योकिँ जिसके काबू मे गुस्सा नही होता, उसके काबू मे कुछ नही होता" ऐसा मेरी माँ कहती है, और शायद सही कहती है" . . . "माँ वो है, जो हमे ये एहसास दिलाती है, कि हमसे अच्छा इस दुनिया मे और कोई नही है" . . . "ये जिन्दगी एक रेस है, और हमे ये रेस जीतनी है"