Vivek Maurya

Kanpur, Uttar Pradesh

Vivek Maurya

Kanpur, Uttar Pradesh

संसकारों से जुड़ा मगर खयालो से आजाद हु मै। चुप रहू तो चुप बोलू तो बातो की खान हु मै। नीम सा कड़वा तो कभी सहद से मीठा हु मै। गुजरा हुआ पल नहीं जानेवाला वाला लम्हा हु मै। कभी गुमशुदा तो कभी वक्त की तलाश हु मै कभी चमकता हुआ सितारा तो कभी बुझी हुई आग हु मै। तलवार से तेज तो कभी मोम सा कोमल हु मै। माँ की आँखों का तारा हु पिता का अभिमान हु मै। थोडा सा नादान तो थोडा सा सैतान हु मै। कवी की कविता तो नहीं मगर किसी का ख्वाब हु मै।

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